उत्तराखंड मे 2023 तक 10000 पेड़ लगाना एचसीएल फाउंडेशन का लक्ष्य

  उत्तराखंड मे जलवायु परिवर्तन एवं इसके प्रभाव को कम करने के लिए प्रयासरत है एचसीएल फाउंडेशन एचसीएल फाउंडेशन, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा और इनटाक ने त्रि-पक्षीय समझौतापत्र पर हस्ताक्षर किया उत्तराखंड मे 2023 तक 10000 पेड़ लगाना एचसीएल फाउंडेशन का लक्ष्य एचसीएल टेक्नॉलॉजीज़ के सीएसआर आर्म, एचसीएल फाउंडेशन ने आज जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरोद्धार मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एनएमसीजी (नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा) और इनटाक(इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एण्ड कल्चरल हैरिटेज) के साथ त्रि-पक्षीय समझौतापत्र पर हस्ताक्षर किए। इस समझौतापत्र का उद्देश्य देशी प्रजातियों, जैसे ओक, रुद्राक्ष आदि का पौधारोपण करना है। इस समझौतापत्र पर हस्ताक्षर श्री राजीवरंजन मिश्रा, डायरेक्टर जनरल, एनएमसीजी; श्री रोज़ी अग्रवाल, एक्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर, फाईनेंस, एनएमसीजी; मिस निधि पुंधीर, डायरेक्टर, एचसीएल फाउंडेशन; श्री मनु भटनागर, प्रिंसिपल डायरेक्टर, इनटाक की मौजूदगी में किए गए। इसका उद्देश्य 2018 से 2023 के बीच पांच सालों की अवधि में 10000 पेड़ लगाना तथा सामुदायिक सहभागिता द्वारा इनकी सर्वाईवल की दर सर्वाधिक रखना है। यह प्रोग्राम भारत सरकार के नेशनल मिशन ऑन क्लीन गंगा की साझेदारी में औरइसकी एनजीओ पार्टनर इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एण्ड कल्चरल हैरिटेज (इनटाक) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। एचसीएल फाउंडेशन पर्यावरण एवं स्थानीय वनस्पतियों व जीवों के संरक्षण के लिए समर्पित है। एचसीएल फाउंडेशन सभी को किफायती, भरोसेमंद एवं सतत और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए काम कर रहा है। यह जलवायु परिवर्तन एवं इसकेप्रभाव को कम करने के लिए प्रयासरत है। पर्यावरण के संरक्षण के अपने प्रयास में एचसीएल फाउंडेशन प्राकृतिक परिवेश एवं जल संकायों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने, पुनः निर्मित करने और संरक्षित करने के लिए काम करता है। यहप्राकृतिक जल संकायों के संरक्षण के लिए प्रयासरत है, जिसमें नदियों, सागरों, प्राकृतिक झरनों, झीलों आदि का पुनरोद्धार शामिल है। एचसीएल फाउंडेशन इस समझौतापत्र द्वारा न केवल इस वृक्षारोपण को बढ़ाने में सहयोग देगा बल्कि स्थानीय हितधारकों के सक्रिय सहयोग द्वारा इन क्षेत्रों के संरक्षण के लिए भी काम करेगा। एचसीएल फाउंडेशन ने इस साल उत्तराखंड के चमोली जिले में 500 पौधों का पौधारोपण किया। मिस निधि पुंधीर का बयान : ‘‘एचसीएल फाउंडेशन पर हम स्वच्छ, हरे-भरे एवं सेहतमंद समुदायों के विकास एवं दीर्घकालिक परिवर्तन लाने पर केंद्रित हैं। हमें खुशी है कि हमने इनटाक के सहयोग से एनएमसीजी के साथ इस समझौतापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। उत्तराखंड मेंमध्य हिमालय श्रृंखला, जहां से गंगा आगे बढ़ती है, वहां के परिवेश के लिए हमारी साझेदारी बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है। इसलिए यह आवश्यक है कि गंगा की अनेक उपधाराओं से घिरे इस क्षेत्र में पर्यावरण के संरक्षण तथा क्षेत्रीय वृक्षों के प्रतिजागरुकता बढ़ाई जाए। एचसीएल फाउंडेशन विस्तृत स्तर पर वृक्षारोपण के लिए काम कर रहा है और हमने इस साल चमोली जिले में 500 से ज्यादा पौधे लगाए। एनएमसीजी और इनटाक के साथ हमारा सहयोग क्लीन गंगा प्रोजेक्ट पर दर्शनीयप्रभाव डालेगा। हिंडन और यमुना नदी पर वृक्षारोपण अभियान क्लीन गंगा प्रोजेक्ट के लिए बहुत आवश्यक है क्योंकि ये दोनों गंगा की दो महत्वपूर्ण सहायक नदियां हैं। आज का समझौतापत्र इसी दिशा में एक कदम है।’’

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एचसीएल फाउंडेशन का सीएसआर प्रोजेक्ट 900 घरों को लगातार बिजली देने के लिए इन ग्रिड्स के रखरखाव में हर साल 3 करोड़ रु. का अतिरिक्त निवेश करेगा

देहरादून – 30 अप्रैल, 2019 – एचसीएल फाउंडेशन के महत्वाकांक्षी सीएसआर प्रोजेक्ट, समुदाय ने यूपी के हरदोई जिले के 15 गांवों में 14 सोलर मिनी ग्रिड की स्थापना के लिए पिछले एक साल में 30 करोड़ रु. से ज्यादा का निवेश किया है। इस निवेशका उद्देश्य 900 ग्रामीण घरों को लगातार बिजली उपलब्ध कराना है। संगठन इन ग्रिड्स के रखरखाव के लिए अगले पाँच सालों तक हर साल 3 करोड़ रु. भी खर्च करेगा। भारत में बिजली की कमी को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने के तरीकों पर एक राउंड टेबल वार्ता में बोलते हुए एचसीएल समुदाय के एसोशिएट प्रोजेक्ट डायरेक्टर, आलोक वर्मा ने मिनी-ग्रिड्स प्रोजेक्ट के विवरण दिए। उन्होंने कहा,‘‘एचसीएल समुदाय उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से हरदोई जिले के तीन ब्लॉक्स – कछौना, बहंदर और कोठावन में सौर बिजलीकरण कार्यक्रम पर काम कर रहा ह.हमारा विश्वास है कि 15 गांवों में हमारे सौर पॉवर प्रोजेक्टों में गरीब पृष्ठभूमि के हजारों लोगोंकी जिंदगी में परिवर्तन लाने की सामर्थ्य है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हमारे प्रयास भारत सरकार के इस विज़न के अनुरूप हैं कि देश की 40 प्रतिशत जरूरतें रिन्यूएबल संसाधनों से पूरी की जानी चाहिए। आलोक वर्मा ने कहा, ‘‘एचसीएल समुदाय में हमारा मानना है कि सुविधाओं से वंचित रहने वाले गांवों में सौर ऊर्जा पहुंचाकर हम अनेक संबंधित क्षेत्रों में भी गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। इसमें स्वास्थ्य सुविधाओं और शैक्षिक संस्थानों के कार्य में सुधार, अंडरग्राउंड पाईप्स ठीक कर पेयजल उपलब्ध कराना, मिनी वॉटर पंपों को बिजली देकर कृषि में सहयोग और प्रोसेसिंग एवं रेफ्रिजरेशन सिस्टम को बिजली प्रदान करके मछली पालन, दूध उत्पादन आदि के माध्यम से आजीविका के साधन बढ़ाना शामिल है।’’ एचसीएल फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस राउंडटेबल में भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में काम करने वाले 70 से ज्यादा हाई-प्रोफाईल हितधारकों ने हिस्सा लिया, जिनमें डालमिया भारत फाउंडेशन के सीईओ, श्री विशाल भारद्वाज; श्नीदर इलेक्ट्रिक इंडियाफाउंडेशन के सीओओ, श्री अभिमन्यु साहू; सरल ऊर्जा नेपाल प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर, श्री बिशाल थापा; मार्ट के संस्थापक, श्री प्रदीप कश्यप; स्मार्ट पॉवर इंडिया के डायरेक्टर- प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन, श्री समित मित्रा और क्लैरो एनर्जी के को-फाउंडर एवं डायरेक्टर, श्री गौरव कुमार शामिल हैं। इस राउंडटेबल में जिन मुख्य समस्याओं पर वार्ता की गई, उनमें भारत में ऊर्जा के संकट का समाधान करने के लिए सतत बिज़नेस मॉडल की स्थापना, स्थानीय समुदायों के बीच उद्यमशीलता के दृष्टिकोण का विकास, ताकि वो विस्तार कर बिना किसी बाहरीमदद के सौर ग्रिड चला सकें और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक परिवेश का निर्माण शामिल हैं। वक्ताओं ने जमीनी स्तर पर काम करने के अपने अनुभव बताए तथा कॉर्पोरेट, सरकार एवं नॉन-प्रॉफिट संगठनों के बीच सहयोग से सौर बिजलीकरणके कार्यक्रमों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। एचसीएल फाउंडेशन के समुदाय प्रोजेक्ट का उद्देश्य छः मापदंडों पर केंद्रित होकर हरदोई में मॉडल ग्राम का विकास करना है। ये छः मापदंड हैं – बुनियादी ढांचा, कृषि की विधियां, आजीविका, वॉश (वाटर, सैनिटेशन एवं हाईज़ीन), स्वास्थ्य एवं शिक्षा। सौरबिजलीकरण कार्यक्रम इस प्रोजेक्ट के तहत समुदाय द्वारा चलाया गया एक बड़ा अभियान है। इसका उद्देश्य गांवों में, खासकर स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों में बिजली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। एचसीएल समुदाय के बारे में एचसीएल समुदाय की स्थापना 2014 में की गई। यह एचसीएल फाउंडेशन का एक प्रयास है, जिसका उद्देश्य एक सतत, स्केलेबल एवं दोहराने योग्य मॉडल का विकास करना है – ऐसा मॉडल, जो ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए एकसोर्स कोड बने। वर्तमान में यह छः सेक्टरों – कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, आजीविका एवं वॉटर, सैनिटेशन और हाईज़ीन (वॉश), में राज्य सरकार, ग्रामीण समुदायों, एनजीओ, शैक्षिक संस्थानों और सहयोगी संस्थानों की मदद से किया जा रहा है। इसप्रोजेक्ट का उद्देश्य उपरोक्त वर्णित छः सेक्टरों में चयनित किए गए गांवों में अथक प्रयासों द्वारा ग्रामीण भारत के उत्थान के लिए विकास के सतत मॉडलों की पहचान व निर्माण करना है।

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