IIT में पढ़ रहे कमजोर छात्रों को बीच में नहीं छोड़नी पड़ेगी पढ़ाई, अब मिलेगा यह विकल्‍प

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में देश भर के 23 संस्‍थानों में से 2,461 छात्र (ग्रेजुएट व पोस्‍ट ग्रेजुएट दोनों) अपना कोर्स पूरा नहीं कर पाए थे और उन्‍हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी.

नई दिल्ली: 

आईआईटी (IIT) में पढ़ना ज्‍यादातर छात्रों का सपना होता है. हालांकि उसके लिए एंट्रेंस एग्‍जाम को पास कर आईआईटी में दाखिला लेना एक बेहद ही मुश्किल काम है क्‍योंकि आईआईटी की प्रवेश परीक्षा को देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक माना जाता है. कई बार ऐसा भी देखा गया है कि छात्र जीतोड़ मेहनत कर एंट्रेंस एग्‍जाम पास कर आईआईटी पहुंच तो जाते हैं लेकिन वहां पहुंचने के बाद 4 साल के बी-टेक कोर्स पूरा करने में उन्‍हें परेशानी का सामना करना पड़ता है. इस वजह से कई छात्रों को कोर्स बीच में ही छोड़ना पड़ जाता है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में देश भर के 23 संस्‍थानों में से 2,461 छात्र (ग्रेजुएट व पोस्‍ट ग्रेजुएट दोनों) अपना कोर्स पूरा नहीं कर पाए थे और उन्‍हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी. अब ऐसे कमजोर छात्रों के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय एक ऐसा विकल्‍प लेकर आया है जिससे उन्‍हें अपनी पढ़ाई बीच में ही नहीं छोड़नी पड़ेगी. ऐसे छात्रों के पास संस्थान से तीन साल में बीएससी (BSc) की डिग्री लेने का विकल्प होगा. हालांकि इसकी प्रक्रिया क्‍या होगी यह तय करने का अधिकार सभी आईआईटी संस्‍थानों को दिया गया है.

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में हुई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान परिषद की बैठक में शुक्रवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी. मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पढ़ाई में कमजोर ऐसे छात्र जो अगले सेमेस्टर में प्रवेश के लिए जरूरी क्रेडिट (अंक) पाने में सफल नहीं होते उन्हें दूसरे सेमेस्टर के बाद डिग्री पाठ्यक्रम के माध्यम से इंजीनियरिंग छोड़ने का विकल्प दिया जा सकता है, बजाय संस्थान छोड़कर जाने के. अधिकारी ने कहा, ‘‘इस संबंध में फैसला सभी आईआईटी अपने अनुसार लेंगे.”

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